मगध विश्वविद्यालय – बी.एड. इंडक्शन मीट
1 सितंबर 2025 को मगध विश्वविद्यालय (बोधगया) के शिक्षा विभाग में बी.एड. सत्र 2025–27 के नवप्रवेशित छात्रों के लिए इंडक्शन मीट का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से हुई। विभागाध्यक्ष प्रो. प्रभात कुमार ढल और मंच संचालक डॉ. रश्मि सिन्हा ने स्वागत भाषण में पाठ्यक्रम की संरचना और महत्व पर प्रकाश डाला। निदेशक प्रो. सुशील कुमार सिंह ने समाज निर्माण में छात्रों की भूमिका पर बल दिया। विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम, दिनचर्या, ड्रेस कोड, आचरण और उपलब्ध संसाधनों से अवगत कराया गया। अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
पटना विश्वविद्यालय – स्नातक इंडक्शन मीट
पटना विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में नवप्रवेशित स्नातक छात्रों के लिए इंडक्शन मीट आयोजित किया गया। इसमें छात्रों को विभाग, पाठ्यक्रम, समय-सारणी, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ, NCC, NSS, छात्रावास आदि की विस्तृत जानकारी दी गई। यह कार्यक्रम मगध महिला कॉलेज, बिहार नेशनल कॉलेज, पटना साइंस कॉलेज, पटना कॉलेज और वाणिज्य महाविद्यालय में समयबद्ध ढंग से संपन्न हुआ। कक्षाओं की शुरुआत 3 जुलाई से की गई थी।
राजनीतिक दृष्टिकोण: क्या कह रहे हैं शासन और विपक्ष?
शासन / राज्य सरकार (सत्तारूढ़ पक्ष – NDA/JDU)
चुनाव-पूर्व समय में बिहार सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में कई लोककल्याणकारी कदम उठाए हैं:
- डोमिसाइल नीति: शिक्षकों की नियुक्ति में बिहार निवासियों को प्राथमिकता देने वाला नया नियम लागू किया गया है। TRE-4 (Teachers Recruitment Exam-4) से यह नियम प्रभावी होगा, जिसमें लगभग 85% पद बिहार के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित रहेंगे।
- शैक्षिक सहायक कर्मचारियों का मानदेय वृद्धि: मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम के रसोइयों, चौकीदारों, शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षकों आदि का मानदेय दोगुना कर दिया गया है। उदाहरण के लिए—रसोइयों का मानदेय ₹1,650 से बढ़ाकर ₹3,300, चौकीदारों का ₹5,000 से ₹10,000 और फिजिकल एजुकेशन इंस्ट्रक्टर का ₹8,000 से ₹16,000 कर दिया गया।
सरकार इन कदमों को “शिक्षा क्षेत्र का सुदृढ़ीकरण” और “स्थानीय युवाओं व कर्मचारियों के हित में पहल” बता रही है।
विपक्ष (INDIA ब्लॉक / RJD आदि)
- विपक्ष का कहना है कि—
विधानसभा चुनावी माहौल में, तेजस्वी यादव ने सरकार पर “योजनाओं के दुरुपयोग” और “संस्थागत भ्रष्टाचार” के आरोप लगाए। उनका कहना है कि सरकार ने शिक्षा समेत कई क्षेत्रों में पारदर्शिता के बजाय “खोखले वादे” (जुमले) दिए हैं।
- दूसरी ओर, NDA के नेताओं जैसे उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, JDU प्रवक्ता मानस यादव और BJP नेताओं ने RJD पर तीखा हमला बोला। उन्होंने विपक्ष की शिक्षा और रोजगार संबंधी घोषणाओं (जैसे पेन बाँटने की योजना) को “चुनावी चमक-दमक” करार दिया और RJD शासनकाल की “भ्रष्ट नियुक्तियों” तथा “बेरोजगारी” को मुख्य मुद्दा बनाया।
श्रीमती हरिप्रिया भार्गवजी, अध्यक्ष – सनातन सांस्कृतिक संघ की टिप्पणी
बिहार के विश्वविद्यालयों में आयोजित इंडक्शन मीट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए श्रीमती हरिप्रिया भार्गवजी ने कहा:
“शिक्षा केवल रोजगार पाने का साधन नहीं है, बल्कि यह चरित्र निर्माण और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव उत्पन्न करती है। बिहार के विश्वविद्यालयों में हो रहे इंडक्शन मीट इस दिशा में सराहनीय प्रयास हैं। आज जब विद्यार्थी अपने नए सफर की शुरुआत कर रहे हैं, उन्हें यह समझना होगा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाना है।”
उन्होंने आगे कहा:
“शासन और विपक्ष—दोनों को चाहिए कि शिक्षा के मुद्दे को राजनीति से ऊपर उठाकर देखें। यदि हमारे युवा सशक्त होंगे, तो समाज और संस्कृति स्वतः सशक्त होगी। सनातन सांस्कृतिक संघ का मूल संदेश ही यही है कि ज्ञान और संस्कार मिलकर जीवन को सार्थक बनाते हैं।”
निष्कर्ष
मगध और पटना विश्वविद्यालयों में आयोजित इंडक्शन मीट छात्रों के लिए एक सकारात्मक और सार्थक शुरुआत है। नए छात्रों को शिक्षा-संस्कृति, पाठ्यक्रम और संसाधनों से परिचित कराना न केवल उनकी पढ़ाई को सहज बनाता है, बल्कि उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में भी प्रेरित करता है।
राजनीतिक दृष्टिकोण भले ही विभाजित हो—
- सरकार इसे अपनी शिक्षा-नीति की सफलता बता रही है।
- विपक्ष इसे चुनावी रणनीति और ध्यान भटकाने का साधन मान रहा है।
लेकिन इस बहस के बीच सबसे महत्वपूर्ण है कि छात्रों और शिक्षा से जुड़े हितधारकों की आवाज सुनी जाए। अंततः असली उद्देश्य है—छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करना






