Facebook Pixel Tracker
2025 का अद्भुत संयोग: चंद्र ग्रहण और पितृ पक्ष – वैज्ञानिक, धार्मिक व आध्यात्मिक प्रभाव
September 9, 2025
दीपोत्सव से छठ पूजा तक : प्रकाश, प्रेम और पुनर्जागरण का महापर्व​
October 29, 2025

नवरात्रि में देवी के नौ स्वरूप और उनका आध्यात्मिक महत्व

नवरात्रि में देवी के नौ स्वरूप और उनका आध्यात्मिक महत्व

नवरात्रि सनातन धर्म का एक अत्यंत पावन और दिव्य पर्व है। यह केवल देवी दुर्गा की आराधना ही नहीं बल्कि सनातन संस्कृति के मूल सिद्धांतों – शक्ति, भक्ति और ज्ञान – का उत्सव भी है। नौ दिनों तक माँ के नौ स्वरूपों की पूजा करके हम जीवन के अलग-अलग मूल्यों को आत्मसात करते हैं।

१. माँ शैलपुत्री

नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा होती है। यह पर्वत राजा हिमालय की पुत्री हैं। इन्हें माँ प्रकृति का स्वरूप माना जाता है। साधक इस दिन आत्मबल और स्थिरता प्राप्त करते हैं।

२. माँ ब्रह्मचारिणी

दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की आराधना होती है। वे तपस्या और संयम का प्रतीक हैं। उनकी पूजा से भक्तों को धैर्य, ज्ञान और भक्ति की शक्ति मिलती है।

 

३. माँ चंद्रघंटा

तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की उपासना की जाती है। इनके मस्तक पर अर्धचंद्र है और इनके स्वरूप से वीरता और निर्भयता की प्रेरणा मिलती है।

४. माँ कूष्मांडा

चौथे दिन माँ कूष्मांडा की पूजा होती है, जिन्हें ब्रह्मांड की सृजनकर्ता माना जाता है। उनकी उपासना से जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और सकारात्मकता आती है।

५. माँ स्कंदमाता

पांचवें दिन माँ स्कंदमाता की आराधना की जाती है। वे भगवान कार्तिकेय की माता हैं। इनकी पूजा से भक्तों को पारिवारिक सुख और संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।

६. माँ कात्यायनी

छठे दिन माँ कात्यायनी की उपासना होती है। वे युद्ध और साहस की देवी मानी जाती हैं। उनकी कृपा से शत्रु नाश और विजय की प्राप्ति होती है।

७. माँ कालरात्रि

सातवें दिन माँ कालरात्रि की आराधना होती है। उनका स्वरूप अत्यंत भयानक है लेकिन वे अपने भक्तों का भय दूर कर उन्हें साहस और सुरक्षा प्रदान करती हैं।

८. माँ महागौरी

आठवें दिन माँ महागौरी की पूजा होती है। उनका स्वरूप अत्यंत श्वेत और शांत है। वे पवित्रता, करुणा और मोक्ष की प्रतीक हैं।

९. माँ सिद्धिदात्री

नवरात्रि के नवें दिन माँ सिद्धिदात्री की उपासना होती है। वे सिद्धियों और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी हैं। साधक को आध्यात्मिक उन्नति और आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है।

निष्कर्ष

नवरात्रि केवल माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना का पर्व नहीं है, बल्कि यह सनातन धर्म की गहन शिक्षाओं का प्रतिबिंब भी है। प्रत्येक रूप हमें जीवन के मूल्यों—धैर्य, तपस्या, साहस, मातृत्व, करुणा और आत्मज्ञान—का स्मरण कराते है। सनातन धर्म का सार यही है कि हम धर्म, सत्य और शक्ति के मार्ग पर चलकर अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाएँ और समाज में शांति व समरसता का विस्तार करें। इस प्रकार, नवरात्रि हमें यह सिखाती है कि “शक्ति ही भक्ति है और भक्ति ही मोक्ष का मार्ग”। यही सनातन धर्म का वास्तविक स्वरूप है, जो आज भी मानवता को मार्गदर्शन और ऊर्जा प्रदान करते है।

Stories

Other Stories

January 16, 2026

सनातन संस्कृति की पुनर्जागरण गाथा: जब एक मंच पर एकत्र हुए हजारों सनातनी और एक साझा संकल्प

सनातन संस्कृति की पुनर्जागरण गाथा: जब एक मंच पर एकत्र हुए हजारों सनातनी और एक साझा संकल्प सनातन सांस्कृतिक संघ के सदस्यता अभियान में हुआ पुस्तक […]
January 16, 2026

मकर संक्रांति: सूर्य, धर्म और भारतीय एकता का महापर्व ​

मकर संक्रांति: सूर्य, धर्म और भारतीय एकता का महापर्व भारत की सनातन परंपरा में कुछ पर्व केवल उत्सव नहीं होते, वे जीवन-दर्शन होते हैं। मकर संक्रांति […]

You cannot copy content of this page