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Sanatan Sanskrutik Sangh - Haripriyaa Bharggav
सनातन सांस्कृतिक संघ क्या है?
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ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है

सनातन जाग चुका है।

जिन भारतीय महिलाओं का सिंदूर पाकिस्तानी आतंकवादियों ने धर्म पूछकर मिटा दिया, वह सिर्फ एक मांग की लकीर नहीं थी — वह उनके सनातन धर्म की आस्था, पहचान और जीवनसाथी के साथ अटूट रिश्ते का प्रतीक थी।
इस कायरतापूर्ण कृत्य के पीछे केवल बंदूक नहीं थी, बल्कि सनातन संस्कृति पर हमला करने की एक सोची-समझी साजिश थी।
इसमें चीन जैसे देशों की छिपी कूटनीति और पाकिस्तान की नापाक योजनाएं साफ नजर आती हैं।

हाल ही में कश्मीर के पहलगाम में जो हुआ, वह दिल दहला देने वाला था।
धार्मिक पहचान पूछकर निर्दोष पर्यटकों की हत्या कर दी गई।
यह कोई सामान्य आतंकी हमला नहीं था — यह सीधा धर्मयुद्ध था।
यह वार केवल एक व्यक्ति पर नहीं, पूरे सनातन धर्म और भारत की आत्मा पर था।

भारत अब सक्षम है

भारत ने बीते कई वर्षों में संयम और जिम्मेदारी का परिचय दिया।
हर बार पाकिस्तान और उसके पाले हुए आतंकियों द्वारा किए गए हमलों के बाद भारत ने वैश्विक मंचों पर अपनी बात रखी।
भारत ने पहले श्रद्धा दिखाई —
फिर शांति की पहल की,
संवाद का प्रयास किया,
और अंत तक धैर्य रखा।
लेकिन जब दुश्मन धर्म पूछकर हत्या करने लगे —
तो अब सहिष्णुता नहीं, संघर्ष की वेला है।

सनातन धर्म केवल श्रद्धा और शांति का प्रतीक नहीं है —
अब वह बन चुका है शौर्य, आत्मबलिदान और राष्ट्रधर्म का जीता-जागता स्वरूप।
अब हर सनातनी के मन में एक ही बात है —
अगर हमारे धर्म, हमारी बहनों के सिंदूर, और हमारे राष्ट्र पर वार होगा —
तो हर प्रहार युद्धभूमि में बदल जाएगा।”

सेना का उत्तर — साहस का प्रतीक

सनातन सांस्कृतिक संघ हमारे पराक्रमी जवानों के प्रति कृतज्ञ है,
जिन्होंने हाल ही में पाकिस्तान के 24 आतंकी अड्डों में से 9 को जड़ से नष्ट कर दिया।
यह केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी —
यह भारत की चुप्पी के अंत की घोषणा थी।
यह स्पष्ट संदेश था कि अब भारत शौर्य के साथ धर्मयुद्ध के लिए तैयार है।

तुमने कायरों की तरह वार किया और भाग खड़े हुए — यही तुम्हारी परंपरा है।
हम सनातनी हैं — हम युद्धभूमि में टिककर शत्रु का अंत करते हैं, यही हमारी परंपरा और धर्म है।

भारत अब आत्मनिर्भर है

आज भारत एक ऐसा राष्ट्र है जो न युद्ध चाहता है, न किसी से डरता है।
हमारी सेना, हमारी रणनीति, और हमारी जनता —
तीनों मिलकर एक नया भारत रच रहे हैं।
हम किसी की सहायता के मोहताज नहीं हैं।
अब हम केवल सीमाओं की रक्षा नहीं कर रहे,
बल्कि आत्मसम्मान, संस्कृति और धर्म की रक्षा भी कर रहे हैं।

राष्ट्रीय एकता की निर्णायक पुकार

सरकार और विपक्ष — मैं दोनों से करबद्ध अनुरोध करती हूँ कि आज किसी की भी भूल या असहमति को लेकर राष्ट्र के सामने संकट की स्थिति न उत्पन्न करें।
जो मुद्दे आपसी हैं, उन्हें घर के भीतर सुलझा लेंगे — लेकिन आज ज़रूरत है कि हम एकजुट होकर पूरे विश्व को यह दिखा दें कि माँ भारती की शक्ति आतंकवाद का पूर्णविराम है।

देश को इस समय सत्ता पक्ष और विपक्ष — दोनों से संयम की आवश्यकता है।
जो कार्य कर रहा है, उसमें सिर्फ सफलता ही नहीं, उसके पीछे का पुरुषार्थ, राष्ट्रप्रेम और कूटनीति भी देखी जानी चाहिए।
कभी-कभी प्रयासों में क्षणिक कमी दिख सकती है, लेकिन उस अधूरी सफलता को पूर्ण करना ही “भारत” है।
विपक्ष का प्रश्न पूछना उसका अधिकार है, और सत्ता पक्ष का उत्तर देना उसकी जिम्मेदारी —
मगर यह उत्तर-प्रश्न आपसी विमर्श में भी हल हो सकते हैं।
आज आवश्यकता है कि भारत — विश्व का सबसे बड़ा सांस्कृतिक और धर्मनिष्ठ लोकतंत्र
पाकिस्तान और उसके पाले हुए आतंकवादियों को एक स्वर में जवाब दे।
हर पक्ष की यह अनिवार्य जिम्मेदारी है कि इस क्षण को गंभीरता से समझें, और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें।

अब भारत की गूंज दुनिया सुन रही है

आज भारत सिर्फ एक भूखंड नहीं, एक चेतना बन चुका है।
जिस भारत को कभी विकासशील देशों की कतार में माना जाता था,
आज वही भारत तकनीक, कूटनीति और सैन्य सामर्थ्य में अग्रणी बनता जा रहा है।

दूसरे देश अब हैरान हैं —
“आख़िर भारत इतनी तेज़ी से कैसे आगे बढ़ रहा है?”
“कहीं ये भारत हमसे आगे तो नहीं निकल जाएगा?”
उनकी आंखों में अब आशंका से ज़्यादा ईर्ष्या झलक रही है।

भारत की सफलता की रफ्तार देख कर कई देशों की सोच बदल रही है —
वो अब सिर्फ चिंता नहीं कर रहे, डरने लगे हैं
क्योंकि अब भारत सिर्फ विकास की बात नहीं करता,
वह विकास जीता है, नेतृत्व करता है, और दुनिया को दिशा देता है।

 

जनता से विशेष अपील:

मैं सभी भारतवासियों से करबद्ध निवेदन करती हूँ —
• श्रद्धा रखें।
• धैर्य बनाए रखें।
• हमारे सिस्टम और सेना पर विश्वास बनाए रखें।
• सोशल मीडिया पर कोई भी गैर-जिम्मेदार पोस्ट न करें जो सेना की रणनीति को प्रभावित करे या मनोबल को गिराए।

युद्ध सिर्फ नीतियों और हथियारों से नहीं — बल्कि शब्दों और सूचनाओं से भी लड़ा जाता है।
हर पोस्ट, हर शब्द, एक ज़िम्मेदारी है।

यह केवल एक सैन्य ऑपरेशन नहीं — यह “ऑपरेशन सिंदूर” है।

  • हर उस आंसू का उत्तर,
    • हर उस विधवा की पीड़ा का बदला,
    • और हर उस सनातनी का संकल्प,
    जो अपने राष्ट्र के लिए प्राण देने को भी तैयार है।

भारत अब निर्णायक मोड़ पर है।
शत्रु चाहे जितना भी प्रयास कर ले,
अब सनातन जाग गया है — अब भारत जाग चुका है।
और वह दिन दूर नहीं जब भारत के आकाश में एक ही उद्घोष गूंजेगा —
भारत विजयी हुआ है — आतंकवाद का अंत हुआ है!”

जय हिन्द।
वंदे मातरम्।
सनातन धर्म की जय।
भारत माता की जय।

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