सनातन सांस्कृतिक संघ की राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती हरिप्रिया भार्गव जी के नेतृत्व में समग्र ग्राम विकास कार्यक्रम की रचना हुई है, और इस पूरे कार्यक्रम की आत्मा है “आशामा”। TVDP केवल एक योजना नहीं है, यह भारत के गाँवों को पुनः उस स्वर्णिम स्वरूप में लाने का संकल्प है जब भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था और वह संकल्प साकार होता है आशामा के तीन आयामों से।
TVDP का संपूर्ण स्वरूप "आशामा" के इन तीन आयामों में समाहित है — जब तीनों एकसाथ साकार होते हैं, तब गाँव वास्तव में आत्मनिर्भर बनता है।
गाँव के हर परिवार को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना हमारा प्रयत्न है। प्राकृतिक खेती और गौ-आधारित खेती को बढ़ावा दिया जाता है। जैविक खाद, देशी बीज और पंचमहाभूतों की रक्षा करते हुए धरती को उसका सम्मान लौटाया जाता है।
मातृशक्ति को कौशल विकास के माध्यम से स्वावलंबी बनाया जाता है। पलायन रोककर गाँव में ही रोजगार के अवसर विकसित किए जाते हैं।
गाँव के हर व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाना हमारी प्राथमिकता है। निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों में सामान्य जाँच, दवा वितरण, दंत चिकित्सा, नेत्र परीक्षण और महिला स्वास्थ्य सेवाएँ दी जाती हैं।
आयुर्वेद, योग, प्राणायाम और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से गाँव के लोगों को स्व-चिकित्सक बनाने का प्रयास है।
गाँव के हर व्यक्ति के मन को संस्कारयुक्त, जागरूक और संतुलित बनाना हमारा लक्ष्य है। सत्संग, पारंपरिक संगीत, नृत्य और कलाओं के माध्यम से मन को सकारात्मक दिशा दी जाती है।
शांति, श्रद्धा और शौर्य के मूल सिद्धांतों से सनातन परंपरा को जागृत किया जाता है।
मोक्षलक्षी वैदिक, जैन, बौद्ध और सिख धर्मों को जाति-वर्ण से ऊपर उठकर एकत्रित व सशक्त करके
धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का सही शास्त्रोक्त प्रचार-प्रसार करना एवं शांति, श्रद्धा और
शौर्य के मूल्यों से समाज, राष्ट्र और विश्व को प्रगति के पथ पर विकसित करना।
मातृशक्ति व युवा शक्ति एवं समस्त मानव जाति के उत्थान हेतु, गौ-गंगा-गाँव संरक्षण, प्राकृतिक खेती,
पंचभूत पर्यावरण एवं प्रत्येक जीवमात्र की रक्षा तथा 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना को जागृत करना है।
"आशामा" की परिकल्पना को भूमि पर साकार करने का सशक्त माध्यम है यह योजना। यह केवल भौतिक विकास तक सीमित नहीं — यह गाँव के समग्र उत्थान का संकल्प है।
जैविक खाद, देशी बीज और गौ-आधारित कृषि से पर्यावरण रक्षा और किसान आत्मनिर्भरता।
निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर, आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा से स्व-चिकित्सक ग्रामीण।
पाठशालाओं और संस्कार केंद्रों के माध्यम से बच्चों और युवाओं को नैतिक और सांस्कृतिक शिक्षा।
सिलाई, हस्तकला, लघु उद्योग और कौशल विकास से हर माँ-बहन को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना।
छोटे व्यवसाय, स्वरोजगार और मार्गदर्शन से युवाओं का गाँव में ही भविष्य निर्माण।
आपसी विवाद सुलझाना, नशामुक्ति, पलायन रोकना और सांस्कृतिक जागरूकता का प्रसार।
TVDP के अंतर्गत निम्नलिखित ३० प्रमुख कार्यबिन्दुओं पर सतत कार्य किया जाएगा।
इस योजना को सफलतापूर्वक अपनाने से एक आदर्श सनातन गाँव को पुनः स्थापित किया जा सकेगा।
जिस काल में भारत को "सोने की चिड़िया" कहा जाता था, वह समृद्धि गाँवों की सशक्त व्यवस्था के कारण ही संभव थी।
जब गाँव फिर से आत्मनिर्भर और संस्कारयुक्त बनेंगे, तब भारत पुनः विश्व में आदर्श राष्ट्र बनेगा।
आशामा के तीनों आयाम साकार होने पर गाँव संगठित बनता है और राष्ट्र की मजबूत नींव तैयार होती है।
अनागत पीढ़ियों के लिए एक संकल्प, एक प्रयास और एक सतत अभियान — सनातन परंपरा का संरक्षण।
समग्र ग्राम विकास योजना (TVDP) सनातन सांस्कृतिक संघ की एक पहल है, जिसका उद्देश्य गांवों के आर्थिक, शारीरिक और मानसिक विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर एवं सशक्त समाज का निर्माण करना है।
"आशामा" मॉडल TVDP की आधारशिला है, जिसमें "आ" आर्थिक एवं आत्मिक उन्नति, "शा" शारीरिक सशक्तता और "मा" मानसिक संतुलन व विकास का प्रतिनिधित्व करता है।
TVDP का मुख्य उद्देश्य गांवों में समग्र विकास को बढ़ावा देना, सामाजिक जागरूकता बढ़ाना और लोगों को आत्मनिर्भर जीवन की ओर प्रेरित करना है।
आशामा मॉडल शिक्षा, स्वास्थ्य, प्राकृतिक खेती, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास और सामाजिक समरसता जैसे क्षेत्रों में संतुलित विकास का मार्ग प्रदान करता है।
नहीं, TVDP आर्थिक विकास के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन, सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक विकास पर भी समान रूप से कार्य करता है।
प्राकृतिक खेती भूमि की उर्वरता बढ़ाने, रासायनिक निर्भरता कम करने और किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ने में मदद करती है।
योजना के अंतर्गत महिलाओं के लिए कौशल विकास, आत्मनिर्भरता, शिक्षा और सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों पर कार्य किया जाता है।
युवाओं को नेतृत्व, सामाजिक सेवा, कौशल विकास और ग्राम विकास गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाता है।
यह योजना समाज के विभिन्न वर्गों को एक साथ जोड़कर सहयोग, सेवा और सामुदायिक विकास की भावना को मजबूत करती है।
TVDP स्थानीय संसाधनों के उपयोग, कौशल विकास, स्वास्थ्य जागरूकता, शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से गांवों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास करती है।
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