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TVDP — Total Village Development Program

समग्र ग्राम विकास योजना

सनातन सांस्कृतिक संघ की राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती हरिप्रिया भार्गव जी के नेतृत्व में समग्र ग्राम विकास कार्यक्रम की रचना हुई है, और इस पूरे कार्यक्रम की आत्मा है “आशामा”। TVDP केवल एक योजना नहीं है, यह भारत के गाँवों को पुनः उस स्वर्णिम स्वरूप में लाने का संकल्प है जब भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था और वह संकल्प साकार होता है आशामा के तीन आयामों से।

TVDP — समग्र ग्राम विकास कार्यक्रम
🏡 ग्राम विकास
🌿 प्राकृतिक खेती
🩺 स्वास्थ्य सेवा
📚 शिक्षा
💪 महिला सशक्तिकरण
🕊️ सामाजिक समरसता
🧘 योग व आयुर्वेद
आशामा

समग्र उन्नति के तीन आयाम

TVDP का संपूर्ण स्वरूप "आशामा" के इन तीन आयामों में समाहित है — जब तीनों एकसाथ साकार होते हैं, तब गाँव वास्तव में आत्मनिर्भर बनता है।

"आ" — आर्थिक एवं आत्मिक उन्नति
Economic & Spiritual Progress

गाँव के हर परिवार को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना हमारा प्रयत्न है। प्राकृतिक खेती और गौ-आधारित खेती को बढ़ावा दिया जाता है। जैविक खाद, देशी बीज और पंचमहाभूतों की रक्षा करते हुए धरती को उसका सम्मान लौटाया जाता है।

मातृशक्ति को कौशल विकास के माध्यम से स्वावलंबी बनाया जाता है। पलायन रोककर गाँव में ही रोजगार के अवसर विकसित किए जाते हैं।

प्राकृतिक खेती कौशल विकास स्वरोजगार मातृशक्ति पलायन रोकना
शा
"शा" — शारीरिक सशक्तता
Physical Empowerment

गाँव के हर व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाना हमारी प्राथमिकता है। निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों में सामान्य जाँच, दवा वितरण, दंत चिकित्सा, नेत्र परीक्षण और महिला स्वास्थ्य सेवाएँ दी जाती हैं।

आयुर्वेद, योग, प्राणायाम और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से गाँव के लोगों को स्व-चिकित्सक बनाने का प्रयास है।

स्वास्थ्य शिविर योग-प्राणायाम आयुर्वेद नशामुक्ति एम्बुलेंस
मा
"मा" — मानसिक संतुलन व विकास
Mental Balance & Development

गाँव के हर व्यक्ति के मन को संस्कारयुक्त, जागरूक और संतुलित बनाना हमारा लक्ष्य है। सत्संग, पारंपरिक संगीत, नृत्य और कलाओं के माध्यम से मन को सकारात्मक दिशा दी जाती है।

शांति, श्रद्धा और शौर्य के मूल सिद्धांतों से सनातन परंपरा को जागृत किया जाता है।

सत्संग आत्मबोध लीगल सेल सांस्कृतिक कला संस्कार केंद्र
सनातन सांस्कृतिक संघ

संघ का उद्देश्य

🪔 हमारा मूल लक्ष्य

मोक्षलक्षी वैदिक, जैन, बौद्ध और सिख धर्मों को जाति-वर्ण से ऊपर उठकर एकत्रित व सशक्त करके धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का सही शास्त्रोक्त प्रचार-प्रसार करना एवं शांति, श्रद्धा और शौर्य के मूल्यों से समाज, राष्ट्र और विश्व को प्रगति के पथ पर विकसित करना।

मातृशक्ति व युवा शक्ति एवं समस्त मानव जाति के उत्थान हेतु, गौ-गंगा-गाँव संरक्षण, प्राकृतिक खेती, पंचभूत पर्यावरण एवं प्रत्येक जीवमात्र की रक्षा तथा 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना को जागृत करना है।

🐄
गौ-सेवा
🌊
गंगा रक्षा
🌾
प्राकृतिक खेती
🌳
पर्यावरण
📖
शास्त्र-प्रचार
🤝
सामाजिक एकता
🌍
वसुधैव कुटुम्बकम्
TVDP

योजना का उद्देश्य

"आशामा" की परिकल्पना को भूमि पर साकार करने का सशक्त माध्यम है यह योजना। यह केवल भौतिक विकास तक सीमित नहीं — यह गाँव के समग्र उत्थान का संकल्प है।

🌾 प्राकृतिक खेती

जैविक खाद, देशी बीज और गौ-आधारित कृषि से पर्यावरण रक्षा और किसान आत्मनिर्भरता।

🩺 स्वास्थ्य एवं चिकित्सा

निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर, आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा से स्व-चिकित्सक ग्रामीण।

📚 शिक्षा व संस्कार

पाठशालाओं और संस्कार केंद्रों के माध्यम से बच्चों और युवाओं को नैतिक और सांस्कृतिक शिक्षा।

👩 महिला सशक्तिकरण

सिलाई, हस्तकला, लघु उद्योग और कौशल विकास से हर माँ-बहन को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना।

🧑‍💼 युवा सहभागिता

छोटे व्यवसाय, स्वरोजगार और मार्गदर्शन से युवाओं का गाँव में ही भविष्य निर्माण।

🏛️ सामाजिक समरसता

आपसी विवाद सुलझाना, नशामुक्ति, पलायन रोकना और सांस्कृतिक जागरूकता का प्रसार।

विस्तृत लक्ष्य

योजना के ३० प्रमुख लक्ष्य

TVDP के अंतर्गत निम्नलिखित ३० प्रमुख कार्यबिन्दुओं पर सतत कार्य किया जाएगा।

  1. मोक्षलक्षी वैदिक, जैन, बौद्ध और सिख धर्मों का शास्त्रोक्त प्रचार-प्रसार एवं समाज-राष्ट्र का विकास।
  2. मंदिरों को नियमित रूप से स्वच्छ रखना तथा भावपूर्वक शास्त्रोक्त पूजा-अर्चना व सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रोत्साहन।
  3. गौ-सेवा, गंगा एवं प्रकृति-संरक्षण तथा ग्राम पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकास।
  4. मोक्षलक्षी धर्म की मूल भावना के अनुरूप जीवन-मूल्यों और आचार-विचार को सुदृढ़ करना।
  5. पाठशालाओं व संस्कार केंद्रों द्वारा बच्चों और युवाओं को नैतिक शिक्षा देना।
  6. हिंदी भाषा के माध्यम से सांस्कृतिक परंपराओं की स्पष्ट जानकारी देना।
  7. मातृशक्ति को कौशल विकास से स्वावलंबी बनाने के प्रयास।
  8. प्राकृतिक खेती, गौ-आधारित कृषि, जैविक खाद एवं देशी बीजों का प्रचार-प्रसार।
  9. सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक पहुँचाने हेतु जागरूकता।
  10. सत्संग, पारंपरिक संगीत, नृत्य और विविध कलाओं को बढ़ावा देना।
  11. आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और घरेलू उपचार की जानकारी देना।
  12. मेडिकल आपात स्थिति में एम्बुलेंस व्यवस्था और अनुभवी डॉक्टरों का मार्गदर्शन।
  13. गाँव के महाजनों को एकत्र रखकर सामाजिक संतुलन बनाए रखना।
  14. सनातन परंपरा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभाव को सुदृढ़ करना।
  15. आपसी विवादों को मैत्रीपूर्ण सुझावों से सुलझाना; आवश्यकता पर लीगल सेल का उपयोग।
  16. पलायन रोककर गाँव में ही आर्थिक स्वावलंबन विकसित करना।
  17. कौशल विकास से खेती, मजदूरी, छोटे व्यापार और ग्रामीण उद्यम को बढ़ावा।
  18. सनातन शाश्वत संस्कृति आधारित शिक्षा व आधुनिक तकनीक से युवाओं को सशक्त बनाना।
  19. युवाओं को छोटे-छोटे व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए मार्गदर्शन।
  20. प्रत्येक १० गाँव पर २ समर्पित कार्यकर्ताओं द्वारा निरंतर मार्गदर्शन।
  21. विशेषज्ञों द्वारा नियमित मेंटरशिप और कौशल-विकास सत्र।
  22. राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यबोध और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना।
  23. गाँव को नशामुक्त बनाने हेतु जागरूकता और सामूहिक प्रयास।
  24. पीड़ितों को मार्गदर्शन, सामाजिक समर्थन एवं आवश्यक सहयोग।
  25. वर्तमान शिक्षा नीति के अंतर्गत सभी बच्चों को शिक्षित करना।
  26. हिंसा, चोरी जैसे दोषों से दूर रखते हुए सकारात्मक जीवन-पथ की ओर प्रेरित करना।
  27. आत्मा और शरीर के भिन्न स्वरूप का ज्ञान कराने हेतु बौद्धिक व आध्यात्मिक प्रयास।
  28. सनातन परंपराओं से जुड़े सभी मोक्षलक्षी दर्शनों के सार को पाठशालाओं द्वारा समझाना।
  29. वैदिक, जैन, बौद्ध एवं सिख परंपराओं के प्राचीन शास्त्रों और दर्शन को समझाना।
  30. व्यक्ति, परिवार और समाज को नैतिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाना।
प्रमुख लाभ

योजना के प्रमुख लाभ

01

इस योजना को सफलतापूर्वक अपनाने से एक आदर्श सनातन गाँव को पुनः स्थापित किया जा सकेगा।

02

जिस काल में भारत को "सोने की चिड़िया" कहा जाता था, वह समृद्धि गाँवों की सशक्त व्यवस्था के कारण ही संभव थी।

03

जब गाँव फिर से आत्मनिर्भर और संस्कारयुक्त बनेंगे, तब भारत पुनः विश्व में आदर्श राष्ट्र बनेगा।

04

आशामा के तीनों आयाम साकार होने पर गाँव संगठित बनता है और राष्ट्र की मजबूत नींव तैयार होती है।

05

अनागत पीढ़ियों के लिए एक संकल्प, एक प्रयास और एक सतत अभियान — सनातन परंपरा का संरक्षण।

समग्र ग्राम विकास योजना (TVDP) से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQs)

1समग्र ग्राम विकास योजना (TVDP) क्या है?

समग्र ग्राम विकास योजना (TVDP) सनातन सांस्कृतिक संघ की एक पहल है, जिसका उद्देश्य गांवों के आर्थिक, शारीरिक और मानसिक विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर एवं सशक्त समाज का निर्माण करना है।

2"आशामा" मॉडल क्या है?

"आशामा" मॉडल TVDP की आधारशिला है, जिसमें "आ" आर्थिक एवं आत्मिक उन्नति, "शा" शारीरिक सशक्तता और "मा" मानसिक संतुलन व विकास का प्रतिनिधित्व करता है।

3TVDP का मुख्य उद्देश्य क्या है?

TVDP का मुख्य उद्देश्य गांवों में समग्र विकास को बढ़ावा देना, सामाजिक जागरूकता बढ़ाना और लोगों को आत्मनिर्भर जीवन की ओर प्रेरित करना है।

4आशामा मॉडल गांवों के विकास में कैसे सहायक है?

आशामा मॉडल शिक्षा, स्वास्थ्य, प्राकृतिक खेती, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास और सामाजिक समरसता जैसे क्षेत्रों में संतुलित विकास का मार्ग प्रदान करता है।

5क्या TVDP केवल आर्थिक विकास पर केंद्रित है?

नहीं, TVDP आर्थिक विकास के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन, सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक विकास पर भी समान रूप से कार्य करता है।

6TVDP में प्राकृतिक खेती को क्यों महत्व दिया गया है?

प्राकृतिक खेती भूमि की उर्वरता बढ़ाने, रासायनिक निर्भरता कम करने और किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ने में मदद करती है।

7महिला सशक्तिकरण TVDP का हिस्सा कैसे है?

योजना के अंतर्गत महिलाओं के लिए कौशल विकास, आत्मनिर्भरता, शिक्षा और सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों पर कार्य किया जाता है।

8युवाओं की भूमिका TVDP में क्या है?

युवाओं को नेतृत्व, सामाजिक सेवा, कौशल विकास और ग्राम विकास गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाता है।

9TVDP सामाजिक समरसता को कैसे बढ़ावा देता है?

यह योजना समाज के विभिन्न वर्गों को एक साथ जोड़कर सहयोग, सेवा और सामुदायिक विकास की भावना को मजबूत करती है।

10समग्र ग्राम विकास योजना आत्मनिर्भर गांव बनाने में कैसे मदद करती है?

TVDP स्थानीय संसाधनों के उपयोग, कौशल विकास, स्वास्थ्य जागरूकता, शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से गांवों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास करती है। 

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