समग्र ग्राम विकास योजना
सनातन सांस्कृतिक संघ की राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती हरिप्रिया भार्गव जी के नेतृत्व में समग्र ग्राम विकास कार्यक्रम की रचना हुई है, और इस पूरे कार्यक्रम की आत्मा है “आशामा”। TVDP केवल एक योजना नहीं है, यह भारत के गाँवों को पुनः उस स्वर्णिम स्वरूप में लाने का संकल्प है जब भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था और वह संकल्प साकार होता है आशामा के तीन आयामों से।
“ आशामा हृदि दीपोऽस्ति, कर्मरात्रौ प्रकाशकः। श्रद्धया पालितो नित्यं, धर्ममार्ग प्रवर्तकः॥ ”
आशामा हृदय में जलने वाला वह दीप है, जो कर्मों की रात्रि में प्रकाश देता है
और श्रद्धा से पोषित होकर मनुष्य को निरंतर धर्ममार्ग पर अग्रसर करती है
आशामा
"आ" — आर्थिक एवं आत्मिक उन्नति
आशामा का पहला आयाम है “आ” — अर्थात आर्थिक एवं आत्मिक उन्नति। TVDP के अंतर्गत गाँव के हर परिवार को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना हमारा प्रयत्न है। इसके लिए प्राकृतिक खेती और गौ-आधारित खेती को बढ़ावा दिया जाता है। जैविक खाद, देशी बीज और पंचमहाभूतों की रक्षा करते हुए धरती को उसका सम्मान लौटाया जाता है, क्योंकि धरती हमारी माँ है और उसकी रक्षा हमारा धर्म है। मातृशक्ति को कौशल विकास के माध्यम से स्वावलंबी बनाया जाता है। सिलाई, हस्तकला, लघु उद्योग — ताकि हर माँ, हर बहन आर्थिक रूप से सशक्त हो। युवाओं को छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू करने का मार्गदर्शन दिया जाता है और पलायन रोककर गाँव में ही रोजगार के अवसर विकसित किए जाते हैं। लेकिन TVDP यहीं नहीं रुकता — आर्थिक उन्नति के साथ-साथ आत्मिक उन्नति भी उतनी ही आवश्यक है। मोक्षलक्षी धर्मों — वैदिक, जैन, बौद्ध और सिख की मूल भावना के अनुरूप जीवन-मूल्यों को सुदृढ़ करना, पाठशालाओं और संस्कार केंद्रों के माध्यम से बच्चों और युवाओं को नैतिक शिक्षा देना और आत्मा के शुद्ध स्वरूप का बोध कराना यही आत्मिक उन्नति है। क्योंकि जब व्यक्ति भीतर से समृद्ध होगा तभी उसका परिवार, उसका गाँव और उसका राष्ट्र समृद्ध होगा।
"शा" — शारीरिक सशक्तता
आशामा का दूसरा आयाम है “शा” — अर्थात शारीरिक सशक्तता। TVDP के अंतर्गत गाँव के हर व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाना हमारी प्राथमिकता है। निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों में सामान्य जाँच, दवा वितरण, दंत चिकित्सा, नेत्र परीक्षण और महिला स्वास्थ्य सेवाएँ दी जाती हैं। मेडिकल आपात स्थिति में गाँव के लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था और अनुभवी डॉक्टरों का मार्गदर्शन सुनिश्चित किया जाता है। साथ ही हमारी प्राचीन परंपरा के अनुसार आयुर्वेद, योग, प्राणायाम और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से गाँव के लोगों को स्व-चिकित्सक बनाने का निरंतर प्रयास किया जाता है — क्योंकि व्यायाम, योग और प्राणायाम सनातन परंपरा का अविभाज्य हिस्सा हैं। गाँव को नशामुक्त बनाना, हिंसा और कुरीतियों से दूर रखना और हर व्यक्ति को स्वस्थ जीवनशैली की ओर प्रेरित करना — यही शारीरिक सशक्तता का संकल्प है। क्योंकि एक स्वस्थ गाँव ही एक समृद्ध राष्ट्र की नींव बन सकता है।
"मा" — मानसिक संतुलन व विकास
आशामा का तीसरा और सबसे गहरा आयाम है “मा” — अर्थात मानसिक संतुलन व विकास। TVDP के अंतर्गत गाँव के हर व्यक्ति के मन को संस्कारयुक्त, जागरूक और संतुलित बनाना हमारा लक्ष्य है। सत्संग कार्यक्रमों, पारंपरिक संगीत, नृत्य और विविध कलाओं के माध्यम से मन को सकारात्मक दिशा दी जाती है। आपसी विवादों को मैत्रीपूर्ण सुझावों और सामाजिक समरसता के माध्यम से सुलझाया जाता है और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी प्रकोष्ठ द्वारा न्याय दिलाने का प्रयास किया जाता है। गाँव के महाजनों को एकत्रित रखकर उनके अनुभव और मार्गदर्शन से सामाजिक संतुलन बनाए रखा जाता है। शांति, श्रद्धा और शौर्य के मूल सिद्धांतों के माध्यम से सनातन परंपरा को जागृत किया जाता है और सामाजिक समरसता, राष्ट्रभाव और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ किया जाता है। आत्मा और शरीर के भिन्न स्वरूप का ज्ञान कराते हुए आत्मबोध और जीवन-दृष्टि का विकास किया जाता है — क्योंकि जब मन शांत, संतुलित और संस्कारयुक्त होगा तभी व्यक्ति, परिवार और समाज — तीनों नैतिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनेंगे।
आशामा — समग्र उन्नति का संकल्प
जब आशामा के तीनों आयाम आर्थिक एवं आत्मिक उन्नति, शारीरिक सशक्तता और मानसिक संतुलन — एक साथ गाँव के जीवन में साकार होते हैं, तब गाँव आत्मनिर्भर, संस्कारयुक्त और संगठित बनता है। ऐसे सशक्त गाँवों से एक जागरूक, समरस और उत्तरदायी समाज का निर्माण होता है और वही समाज राष्ट्र की मजबूत नींव बनकर भारत को पुनः सुसंस्कृत, विकसित और आदर्श राष्ट्र के रूप में विश्व में स्थापित करता है। यही आशामा से प्रेरित TVDP की मूल उपलब्धि होगी — और यही है सनातन सांस्कृतिक संघ का संकल्प।
सनतान सांस्कृतिक संघ का उद्देश्य
हमारा मूल लक्ष्य मोक्षलक्षी वैदिक, जैन, बौद्ध और सिख धर्मों को जाति-वर्ण से ऊपर उठकर एकत्रित व सशक्त करके धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का सही शास्त्रोक्त प्रचार-प्रसार करना एवं शांति, श्रद्धा और शौर्य के मूल्यों से समाज, राष्ट्र और विश्व को प्रगति के पथ पर विकसित करना, मातृशक्ति वे युवा शक्ति एवं समस्त मानव जाति के उत्थान हेतु, गौ-गंगा-गाँव संरक्षण, प्राकृतिक खेती, पंचभूत पर्यावरण एवं प्रत्येक जीवमात्र की रक्षा तथा ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को जागृत करना है।
समग्र ग्राम विकास योजना योजना के लक्ष्य
- हमारा मूल लक्ष्य मोक्षलक्षी वैदिक, जैन, बौद्ध और सिख धर्मों को जाति-वर्ण से ऊपर उठकर एकत्रित व सशक्त करके धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का सही शास्त्रोक्त प्रचार-प्रसार करना एवं शांति, श्रद्धा और शौर्य के मूल्यों से समाज, राष्ट्र और विश्व को प्रगति के पथ पर विकसित करना, मातृशक्ति वे युवा शक्ति एवं समस्त मानव जाति के उत्थान हेतु, गौ-गंगा-गाँव संरक्षण, प्राकृतिक खेती, पंचभूत पर्यावरण एवं प्रत्येक जीवमात्र की रक्षा तथा ‘वसुधैव कुटुंबकम्‘ की भावना को जागृत करना है।
- गाँवों में एवं गाँव के आसपास स्थित मंदिरों को नियमित रूप से स्वच्छ रखने तथा भावपूर्वक शास्त्रोक्त विधि से पूजा-अर्चना, पाठ और सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने का सतत प्रयास किया जाएगा।
- गौ-सेवा, गंगा एवं प्रकृति-संरक्षण तथा ग्राम के पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकसित करने हेतु यथाशक्ति कार्य किए जाएंगे।
- मोक्षलक्षी धर्मों की मूल भावना के अनुरूप जीवन-मूल्यों और आचार-विचार को सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर प्रयत्नशील रहा जाएगा।
- पाठशालाओं / संस्कार केंद्रों के निर्माण द्वारा बच्चों और युवाओं को नैतिक शिक्षा देने का प्रयास किया जाएगा, साथ ही सनातन, जैन, बौद्ध एवं सिख परंपराओं के सांस्कृतिक एवं धार्मिक सत्य इतिहास और विरासत को संरक्षित एवं प्रसारित करने हेतु पूरा योगदान दिया जाएगा।
- सांस्कृतिक गतिविधियों तथा हिंदी भाषा के माध्यम से माताओं, बहनों, भाइयों और बच्चों को हमारी संस्कृति एवं धार्मिक परंपराओं की स्पष्ट जानकारी देने का प्रयास किया जाएगा।
- मातृशक्ति को कौशल विकास के माध्यम से स्वावलंबी बनाने हेतु यथासंभव प्रयास किए जाएंगे, जिससे महिलाएँ आर्थिक, सामाजिक और पारिवारिक रूप से सशक्त बन सकें तथा आत्मनिर्भर जीवन की ओर अग्रसर हों।
- भाइयों के लिए पारंपरिक प्राकृतिक खेती का प्रचार-प्रसार करने, गौ-आधारित खेती, जैविक खाद एवं देशी बीजों के उपयोग से पर्यावरण एवं पंचमहाभूतों की रक्षा करने की दिशा में निरंतर प्रयत्न किया जाएगा। धरती हमारी माँ है—उसकी रक्षा और संवर्धन को हम अपना कर्तव्य मानते हुए कार्य करने का प्रयास करेंगे।
- भारत सरकार की गाँव से संबंधित योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थी परिवारों तक पहुँच सके, इसके लिए जागरूकता बनाए रखने, आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने तथा योजनाओं का पूर्ण लाभ दिलाने हेतु सभी आवश्यक एवं योग्य प्रयास किए जाएंगे।
- सत्संग की योजनाएँ आयोजित करने, पारंपरिक संगीत, नृत्य तथा विविध कलाओं को बढ़ावा देने एवं उनके अभ्यास और प्रस्तुति की व्यवस्था करने का प्रयास किया जाएगा।
- हमारी मूल परंपराओं के आधार पर गाँववासियों को स्व-चिकित्सक बनाने हेतु आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा एवं घरेलू उपचारों की जानकारी देने का निरंतर प्रयास किया जाएगा।
- मेडिकल आपात स्थिति में गाँव के लिए एम्बुलेंस की समुचित व्यवस्था करने तथा योग्य एवं अनुभवी डॉक्टरों के मार्गदर्शन में प्राथमिक उपचार, स्वास्थ्य परामर्श और नियमित स्वास्थ्य जागरूकता सेवाएँ उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
- गाँव के महाजनों को एकत्रित रखकर उनके अनुभव, मार्गदर्शन और निर्णय क्षमता से समाज में संतुलन बनाए रखने हेतु प्रयत्नशील रहा जाएगा।
- शांति, श्रद्धा और शौर्य के मूल सिद्धांतों के माध्यम से सनातन परंपरा को जागृत करने तथा सामाजिक समरसता, राष्ट्रभाव और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने का सतत प्रयास किया जाएगा।
- आपसी विवादों को मैत्रीपूर्ण सुझावों और सामाजिक समरसता के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया जाएगा; आवश्यकता पड़ने पर लीगल सेल (कानूनी प्रकोष्ठ) के माध्यम से कानूनी मार्गदर्शन प्रदान कर मामलों को शांतिपूर्ण रूप से सुलझाने की दिशा में प्रयत्न किया जाएगा।
- पलायन को रोककर गाँव में ही आर्थिक स्वावलंबन विकसित करने हेतु निरंतर प्रयास किए जाएंगे।
- कौशल विकास के माध्यम से खेती, मजदूरी, छोटे व्यापार और ग्रामीण उद्यमों को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास किया जाएगा।
- सनातन शाश्वत संस्कृति आधारित शिक्षा योजनाओं तथा आधुनिक तकनीक और अद्यतन ज्ञान के माध्यम से युवावर्ग और वंचित बच्चों को शिक्षित एवं सशक्त करने हेतु निरंतर प्रयत्नशील रहा जाएगा।
- युवाओं को छोटे-छोटे व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान करने का प्रयास किया जाएगा।
- प्रत्येक 10 गाँवों के समूह पर 2 समर्पित कार्यकर्ताओं के माध्यम से निरंतर मार्गदर्शन एवं विशेष प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
- विशेषज्ञों द्वारा नियमित मेंटरशिप और कौशल-विकास सत्र आयोजित करने का प्रयत्न किया जाएगा।
- भारत माता को हमारी दैवीय माता मानते हुए राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यबोध और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने का सतत प्रयास किया जाएगा।
- गाँव को नशामुक्त बनाने हेतु जागरूकता, मार्गदर्शन एवं सामूहिक प्रयासों द्वारा यथाशक्ति पूर्ण प्रयास किए जाएंगे।
- अन्याय के सामने सक्षम और सशक्त रूप से सहायक बनने, पीड़ितों को मार्गदर्शन, सामाजिक समर्थन एवं आवश्यक सहयोग प्रदान करने की दिशा में प्रयत्न किया जाएगा।
- हमारे मूल संस्कारों को सुरक्षित रखते हुए वर्तमान शिक्षा नीति के अंतर्गत सभी बच्चों को शिक्षित करने और आगे बढ़ाने हेतु निरंतर प्रयासशील रहा जाएगा।
- हिंसा, चोरी, व्यभिचार एवं परिग्रह जैसे दोषों से यथासंभव दूरी रखते हुए, प्रत्येक व्यक्ति को उसके व्यक्तिगत कर्मों के अनुसार सकारात्मक जीवन-पथ अपनाने हेतु संघ निरंतर प्रेरित करने का प्रयास करता रहेगा।
- आत्मा और शरीर के भिन्न स्वरूप का ज्ञान कराने हेतु बौद्धिक, आध्यात्मिक एवं संवादात्मक प्रयास निरंतर किए जाते रहेंगे, जिससे आत्मबोध और जीवन-दृष्टि का विकास हो सके।
- हमारी प्राचीन सनातन परंपराओं से जुड़े सभी मोक्षलक्षी दर्शनों के सार को समझाने और सिखाने का कार्य संघ की पाठशालाओं एवं शिक्षण माध्यमों द्वारा निरंतर किया जाएगा।
- वैदिक, जैन, बौद्ध एवं सिख परंपराओं के प्राचीन शास्त्रों, उनके दर्शन और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझाने एवं सिखाने हेतु समर्पित एवं सतत प्रयास किए जाएंगे।
- इन सभी प्रयासों के माध्यम से व्यक्ति, परिवार और समाज को नैतिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाना इस योजना का मुख्य उद्देश्य रहेगा, जिसके लिए हम निरंतर प्रयत्नशील रहेंगे।
