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सत्ता और विपक्ष के शोर में गुम होती सच्चाई

भारतीय लोकतंत्र की असली शक्ति न तो सिर्फ़ सत्ता में है, न ही केवल विपक्ष में — बल्कि उस जागरूक जनता में है जो सच को पहचानती है, गलत पर सवाल उठाती है और बदलाव की नींव रखती है।

लेकिन अफ़सोस की बात है कि आज यह लोकतंत्र शोर में डूब गया है — आरोपों, जवाबों और सतही बयानों के शोर में। सवाल पूछने का अधिकार केवल चुनाव तक सीमित हो गया है, और जवाब देने की जिम्मेदारी से सभी भागते नज़र आते हैं।

सत्ता बनाम विपक्ष — अब बहस नहीं, अब बदलाव चाहिए

आज सत्ता विपक्ष पर उंगली उठाती है — “ये विकास रोक रहे हैं।”
विपक्ष सत्ता पर सवाल करता है — “आपने किया ही क्या है?”
क्योंकि दोनों ही पक्ष अब एक-दूसरे को नीचा दिखाने में व्यस्त हैं, जनता का मुद्दा पीछे छूट चुका है। बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सुरक्षा, किसान — सब सिर्फ़ भाषणों की ज़ुबान में जिंदा हैं।

विपक्ष का काम सिर्फ़ शोर मचाना नहीं, समाधान बताना है।
सत्ता का काम सिर्फ़ गुणगान करवाना नहीं, जवाबदेही निभाना है।
अगर सरकार ने अच्छा काम किया है, तो उसे स्वीकार करने का साहस विपक्ष में हो।
और अगर सरकार ने चूक की है, तो उसे सुधारने का विवेक सत्ता में हो।

पत्रकारिता — अब वक्त है आईना दिखाने का, पर्दा डालने का नहीं

पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, लेकिन आज यह दो भागों में टूट चुका है:
• एक तरफ़ गोदी मीडिया है, जो हर सरकारी नीति को रामबाण बताती है,
• दूसरी तरफ़ प्रोपेगेंडा मीडिया है, जो हर कदम में साज़िश ढूंढती है।

ऐसे में मीडिया से एक विनम्र अपील है —

आपका कार्य केवल सूचना देना नहीं, सत्य को सामने लाना है।
ना तो पक्षकार बनिए, ना विरोधी — बस जनता की आंख और जुबान बनिए।
आपके सवाल लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत बन सकते हैं।

मगर कौन दिखाएगा कि क्या सही हो रहा है और क्या नहीं? अगर मीडिया ही सिर्फ़ बयान दिखाएगा, तो सच बोलेगा कौन?

👉 अब समय है कि मीडिया फिर से जर्नलिज़्म को जिए। रिपोर्टिंग सिर्फ़ ‘किसने क्या कहा’ तक सीमित न हो — बल्कि ये दिखाए कि “जनता के लिए क्या किया गया? और क्या नहीं किया गया?”
👉 अब समय है कि मीडिया फिर से सत्ता से भी सवाल पूछे, विपक्ष से भी जवाब मांगे, और जनता को सिर्फ़ सूचना नहीं — सच दे।

जनता — तुम ही असली ताकत हो, अब चुप मत रहो!

अगर तुम नहीं जागे तो कोई नहीं जागेगा। तुमने जिनको सत्ता दी है, उन्हें जवाबदेह बनाओ।
तुम जिनकी बात सुनते हो — पत्रकार, नेता, मंच — उन सबसे पूछो: “तुम हमारे लिए क्या कर रहे हो?”

क्योंकि:
• जब तुम चुप रहते हो, झूठ बोलने वाले ज़ोर से बोलते हैं।
• जब तुम सवाल नहीं करते, तब झूठ बिकता है और सच छुपता है।
• जब तुम तमाशा देखते हो, तब तुम्हारे हक़ का सौदा होता है।

🔥 अब वक्त है कि हम खामोशी तोड़ें और सच का साथ दें!
🔥 अब वक्त है कि मीडिया भी जागे और बोले — “हम बिकेंगे नहीं, सच दिखाएँगे।”
🔥 अब वक्त है कि जनता भी बोले — “हमें बहानों की नहीं, जवाब की ज़रूरत है।”

👉 हम न किसी पार्टी के भक्त हैं, न किसी विचारधारा के गुलाम।
हम सिर्फ़ भारत के नागरिक हैं — और हमारी नज़र में जो सच्चा है, हम उसके साथ हैं।

निष्कर्ष — अब सिर्फ़ देखना नहीं, कुछ करना है

अब समय है:
• जब सत्ता जनसेवा का पर्याय बने,
• जब विपक्ष रचनात्मक भूमिका निभाए,
• जब पत्रकारिता फिर से निडर और निष्पक्ष हो,
• और सबसे जरूरी — जब जनता अपनी ताकत पहचाने।

क्योंकि बदलाव सिर्फ़ नारे से नहीं आता,
बदलाव आता है — जब जनता सच के साथ खड़ी होती है।

✍🏻 — श्रीमती हरिप्रिया भार्गव

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