“विंध्यस्य दक्षिणे पार्श्वे, यमुनायाश्च पश्चिमे। बुंदेलखंडमिति ख्यातं, वीरभूमि सनातनम्॥” विंध्य की गोद में, यमुना के आँचल में और बेतवा की पवित्र धारा के किनारे बसी वह […]
“संस्कारो हि नाम संस्कार्यस्य गुणाधानेन वा स्यात्, दोषापनयनेन वा।” — महर्षि पाणिनि अर्थात्, संस्कार वह प्रक्रिया है जो व्यक्ति में उत्कृष्ट गुणों को जोड़ती है और […]